हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। उन्होंने तेलंगाना से 10 से 15 हजार लोगों को एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए की रैली में शामिल होने की अपील की। इस रैली के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाएगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एसआईआर प्रक्रिया के जरिए गरीबों के मताधिकार को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा जरूरी है। कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग प्रभावित हो सकते हैं।
रामलीला मैदान में होगी विपक्ष की रैली
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने निर्वाचन आयोग के कामकाज में सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष इस रैली के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
वेणुगोपाल ने दावा किया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आए दस्तावेजों से निर्वाचन आयोग के कामकाज में सरकार की कथित भूमिका को लेकर विपक्ष के आरोपों को बल मिला है।
चुनावी पारदर्शिता को बनाएगा मुद्दा
कांग्रेस और आइएनडीआइए के अन्य घटक दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, मताधिकार की सुरक्षा और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को प्रमुख मुद्दा बनाया है। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से दिल्ली की रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। एक नवंबर को होने वाली इस रैली में विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर अपना पक्ष रखेंगे।





