कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील देने के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि इससे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मजबूत होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रतिबंध हटाने से रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल सकती है और शांति स्थापित करने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।
अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन को दिए साक्षात्कार में जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ संबंधों में आए तनाव पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप के साथ उनके मतभेद व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि रूस के प्रति अमेरिकी नीति को लेकर हैं। जेलेंस्की के अनुसार, रूस पर दबाव कम करना यूक्रेन के हितों के खिलाफ है।
रूस के प्रति अमेरिकी रुख पर सवाल
जेलेंस्की की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका ने रूस के प्रति अपने रुख में नरमी दिखाई है। अमेरिकी प्रशासन ने रूसी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में छूट दी है। ट्रंप का तर्क है कि नाजुक दौर में चल रही बातचीत के दौरान प्रतिबंध लगाने से शांति समझौते की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, जेलेंस्की का मानना है कि पुतिन युद्ध समाप्त करने के लिए गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रूस पर दबाव कम करने से मॉस्को को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
रूसी तेल खरीद और स्टारलिंक को लेकर भी चिंता
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस से ईंधन खरीदने की अमेरिकी योजना पर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिलेगा और युद्ध जारी रखने के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
इसके अलावा, यूक्रेन की सेना के लिए महत्वपूर्ण स्टारलिंक उपग्रह इंटरनेट सेवा पर लगी पाबंदियों को लेकर भी चिंता सामने आई है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से अधिक प्रभावी वायु रक्षा मिसाइलों की आवश्यकता है।
युद्धविराम के लिए बातचीत जारी
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन युद्ध रोकने और शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस पर पर्याप्त दबाव बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने सहयोगी देशों से प्रतिबंधों में ढील देने के बजाय यूक्रेन की रक्षा क्षमता मजबूत करने की अपील की।
इस बीच, अमेरिका युद्ध समाप्त कराने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अब भी प्रमुख चुनौती बने हुए हैं।





