मॉस्को। रूस ने अपने रणनीतिक बमवर्षक विमानों को सुरक्षित रखने के लिए बड़े पैमाने पर मजबूत और बख्तरबंद शेल्टरों का निर्माण शुरू कर दिया है। यह कदम उस पुरानी नीति से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसके तहत देश के Tu-95 और Tu-160 जैसे भारी बमवर्षक विमान वर्षों तक खुले रनवे और एयरबेस पर खड़े रखे जाते थे।
सैटेलाइट तस्वीरों और रक्षा विश्लेषकों की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के प्रमुख एयरबेसों पर इन दिनों बड़े डोम आकार के और कंक्रीट से बने सुरक्षात्मक ढांचे तेजी से बनाए जा रहे हैं। इनमें मोटे ब्लास्ट-रेजिस्टेंट दरवाजे और मिट्टी से ढके कवर जैसी अतिरिक्त सुरक्षा परतें भी शामिल हैं, ताकि विमानों को संभावित हमलों से बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव हाल के वर्षों में ड्रोन और लंबी दूरी के मिसाइल हमलों के बढ़ते खतरे के कारण किया जा रहा है। यूक्रेन के ड्रोन अभियानों ने रूस के कई एयरबेसों को निशाना बनाया है, जिससे रणनीतिक विमानन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इसी के बाद रूस ने अपने उच्च-मूल्य वाले सैन्य विमानों को खुले में रखने की बजाय सुरक्षित संरचनाओं में रखने का निर्णय लिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ एयरबेसों पर दर्जनों नए शेल्टरों का निर्माण देखा गया है। इनमें ऐसे ढांचे शामिल हैं जो न केवल विमानों को विस्फोट और मलबे से बचा सकते हैं, बल्कि उन्हें उपग्रह निगरानी से छिपाने में भी मदद कर सकते हैं।
पहले रूस और अमेरिका के बीच हुए हथियार नियंत्रण समझौतों के तहत रणनीतिक बमवर्षकों को खुले में रखना अनिवार्य माना जाता था, ताकि उपग्रहों के जरिए उनकी संख्या और स्थिति की निगरानी की जा सके। हालांकि, बदलते सुरक्षा हालात और बढ़ते हमलों ने इस नीति को अप्रासंगिक बना दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है, जहां अब कम लागत वाले ड्रोन भी अत्याधुनिक सैन्य ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम हो गए हैं। ऐसे में एयरबेसों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक रणनीतियों में बदलाव जरूरी हो गया है।
रूस का यह निर्माण अभियान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में उसके रणनीतिक एयरबेस और अधिक “हार्डनड” और सुरक्षित ढांचे में तब्दील हो सकते हैं।
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