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चमोली में चीन सीमा के पास शालिग्राम भंडार की खोज, टेथिस महासागर के अस्तित्व के संकेत: वैज्ञानिक

चमोली (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा के निकट शालिग्राम (अमोनाइट जीवाश्म) का विशाल भंडार मिलने से भूवैज्ञानिकों में उत्सुकता बढ़ गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज करोड़ों वर्ष पुराने टेथिस महासागर के अस्तित्व की ओर महत्वपूर्ण संकेत देती है।

स्थानीय क्षेत्र में मिली इन शिलाओं और जीवाश्मों का अध्ययन कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, ये संरचनाएँ लगभग 16 मिलियन वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं। इनका संबंध उस प्राचीन महासागर से माना जा रहा है, जो कभी हिमालय क्षेत्र में फैला हुआ था और बाद में भूगर्भीय हलचलों के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखला के रूप में परिवर्तित हो गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि शालिग्राम शिलाएँ वास्तव में समुद्री जीव अमोनाइट के जीवाश्म हैं, जो टेथिस महासागर के समय में पाए जाते थे। यह खोज न केवल भूगर्भीय इतिहास को समझने में मदद करती है, बल्कि हिमालय के निर्माण की प्रक्रिया पर भी नए तथ्य उजागर करती है।

स्थानीय प्रशासन और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया है। प्रारंभिक अध्ययन में यह भी सामने आया है कि यह इलाका प्राचीन समुद्री अवशेषों का महत्वपूर्ण केंद्र हो सकता है, जहाँ पहले भी इस प्रकार के जीवाश्म पाए जाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की खोजें हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना और पृथ्वी के इतिहास को समझने में अहम भूमिका निभाती हैं। साथ ही यह क्षेत्र शोध और अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन सकता है।

स्थानीय लोगों में भी इस खोज को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने क्षेत्र को संरक्षित रखने और अनधिकृत खुदाई से बचाने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे के विस्तृत अध्ययन से टेथिस महासागर और हिमालय निर्माण से जुड़े कई और रहस्य सामने आ सकते हैं।

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