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राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा एनडीए, विपक्ष में टूट से बदला सियासी गणित

नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राज्यसभा में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति पहले से अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है। विपक्षी दलों में लगातार हो रही टूट और बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण एनडीए उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गया है। इससे सरकार की विधायी रणनीति को नई मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हाल के महीनों में राज्यसभा चुनावों, कुछ दलों के सांसदों के इस्तीफों और विपक्षी खेमे में बढ़ी असहमति का सीधा लाभ एनडीए को मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी उपचुनावों और संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों में भी सत्तापक्ष को बढ़त मिलती है, तो वह दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच सकता है।

विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के सामने एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और अन्य दलों में उभरे अंदरूनी मतभेदों ने विपक्ष की रणनीतिक ताकत को प्रभावित किया है। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच भी कई मुद्दों पर मतभेद सामने आने से विपक्ष की सामूहिक ताकत कमजोर होती दिख रही है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि एनडीए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सफल होता है, तो संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में उसे अपेक्षाकृत कम राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए सदन की वास्तविक संख्या, रिक्त सीटों, उपचुनावों के परिणाम और सहयोगी दलों के समर्थन जैसे कई कारक निर्णायक होंगे।

इसी बीच विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल राजनीतिक रूप से विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर भाजपा और एनडीए का कहना है कि बदलते राजनीतिक समीकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और विभिन्न दलों के नेता अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय ले रहे हैं। ऐसे में आगामी मानसून सत्र में राज्यसभा का बदला हुआ अंकगणित कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों की दिशा तय कर सकता है।

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