नई दिल्ली। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां पीड़ित महिलाओं और परिवारों की दर्दनाक स्थिति देखकर वह आठ दिनों तक सो नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि हिंसा से प्रभावित लोगों की आपबीती बेहद हृदयविदारक थी और कई परिवार आज भी भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं।
रहाटकर ने बताया कि राहत शिविरों में रहने वाली महिलाओं ने उनके सामने अपने साथ हुई घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। कई परिवारों को रातोंरात अपने घर छोड़ने पड़े, जबकि कुछ महिलाएं छोटे–छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हुईं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने महिलाओं और बच्चों पर गहरा मानसिक प्रभाव छोड़ा है।
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने कहा कि आयोग ने प्रभावित महिलाओं की समस्याओं और आवश्यकताओं का विस्तृत आकलन किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनके पुनर्वास के लिए आयोग हरसंभव प्रयास करेगा। साथ ही राज्य प्रशासन से भी अपेक्षा की गई है कि वह हिंसा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे।
रहाटकर ने कहा कि राहत शिविरों में कई महिलाओं ने अपने घर, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा खोने की पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल कानून–व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और महिलाओं की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा हैं। आयोग पीड़ित परिवारों के संपर्क में बना रहेगा और उनकी सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
उन्होंने कहा कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं और बच्चों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में त्वरित राहत, प्रभावी पुनर्वास और निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि प्रभावित परिवार सामान्य जीवन की ओर लौट सकें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।





