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ममता बनर्जी के बनाए ‘जोड़ा घास फूल’ पर लगी रोक, जानिए इंदिरा गांधी के पुराने मामले से क्या है संबंध

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयोग ने कहा कि दोनों गुट पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं, इसलिए अंतिम निर्णय होने तक दोनों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए जाएंगे।

ममता ने खुद तैयार किया था चुनाव चिह्न

तृणमूल कांग्रेस की स्थापना वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर हुई थी। पार्टी के गठन के समय ममता बनर्जी ने कथित तौर पर ‘जोड़ा घास फूल’ की रूपरेखा खुद हाथ से तैयार की थी। दो फूलों को एक ही डंठल और जड़ से जुड़े दिखाने वाले इस प्रतीक को पार्टी की एकता और जमीनी जुड़ाव से जोड़ा गया। करीब 28 वर्षों तक यह चिह्न तृणमूल की पहचान बना रहा।

दो गुटों के बीच विवाद

चुनाव आयोग के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं। मौजूदा समय में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और दूसरे गुट के बीच पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न को लेकर दावा है। आगामी 6 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था की है।

ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल उपचुनावों के लिए लागू है।

इंदिरा गांधी के पुराने मामले से क्यों जुड़ा है फैसला?

चुनाव आयोग का मौजूदा फैसला Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 से जुड़ा है। इसी प्रावधान के तहत 1969 में कांग्रेस के विभाजन के दौरान पार्टी और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद का फैसला किया गया था। उस समय इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट और कांग्रेस के दूसरे गुट के बीच पार्टी पर अधिकार को लेकर विवाद हुआ था।

उस मामले में आयोग ने पार्टी के संगठनात्मक समर्थन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के समर्थन समेत कई पहलुओं पर विचार किया था। बाद के वर्षों में भी शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे दलों के विभाजन से जुड़े मामलों में चुनाव चिह्न को लेकर आयोग के सामने इसी तरह के विवाद आए हैं।

फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आयोग आगे दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद इस पर निर्णय करेगा।

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