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मद्रास हाईकोर्ट से एमके स्टालिन को झटका, कोलाथुर चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को बड़ा झटका देते हुए कोलाथुर विधानसभा सीट से टीवीके विधायक वीएस बाबू की जीत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने याचिका को ‘पोषणीय नहीं’ (Not Maintainable) माना।

मुख्य न्यायाधीश एसए धमिकाधिकारि और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने यह फैसला सुनाया। स्टालिन ने याचिका में कोलाथुर सीट पर 100 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों की गिनती कराने और निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल हुई सभी 286 ईवीएम की जांच एवं सत्यापन कराने की मांग की थी।

स्टालिन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि उन्होंने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 7 मई को ईवीएम की जांच और सत्यापन के लिए आवेदन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ ईवीएम में गड़बड़ियां सामने आईं। विशेष रूप से मतदान केंद्र संख्या 208 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां बैलेट यूनिट का पता नहीं चल रहा था और कंट्रोल यूनिट में स्टालिन का नाम भी प्रदर्शित नहीं हुआ।

वहीं, चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं जी. राजगोपालन और दामा शेषाद्री नायडू ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया। आयोग ने कहा कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने का उचित कानूनी माध्यम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80 के तहत चुनाव याचिका है। संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत इस मामले में रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।

अदालत ने आयोग की दलील से सहमति जताते हुए स्टालिन की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव संबंधी दावों को उचित मंच पर चुनाव याचिका के माध्यम से उठाया जा सकता है।

इस फैसले से स्टालिन और डीएमके को राजनीतिक एवं कानूनी मोर्चे पर झटका लगा है।

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