नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई। दोनों देशों ने जल्द अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई।
बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने 1.4 अरब नागरिकों के लिए सस्ती और सुगम ऊर्जा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते का जल्द निष्कर्ष निकलना आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। दूसरी ओर रुबियो ने भी भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी और दीर्घकालिक साबित होगा।
वार्ता में ऊर्जा सहयोग, परमाणु क्षेत्र में संभावनाएं, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और हिंद–प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
रक्षा सहयोग के मुद्दे पर जयशंकर ने ‘मेक इन इंडिया’ नीति को अहम बताते हुए कहा कि भविष्य की साझेदारी में स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी। हाल ही में दोनों देशों के बीच 10 वर्षीय रक्षा साझेदारी ढांचे का नवीनीकरण भी किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार बातचीत चल रही है। अमेरिका की टैरिफ नीतियों और वैश्विक भू–राजनीतिक परिस्थितियों के कारण रिश्तों में कुछ तनाव जरूर आया था, लेकिन ताजा वार्ता को संबंधों में नई ऊर्जा देने वाला कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यापार समझौता जल्द पूरा होता है तो इससे दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा।





