आगे रियायत देना मुश्किल, बातचीत अभी जारी; कृषि बाजार खोलने पर बना गतिरोध
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की वार्ता फिलहाल गतिरोध में फंसती नजर आ रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों देश बातचीत में एक ऐसे ‘प्लेटो’ पर पहुंच गए हैं, जहां आगे किसी भी पक्ष के लिए अतिरिक्त रियायत देना या लेना बेहद मुश्किल होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत अभी जारी है और यदि समझौते की गुंजाइश बनी तो दोनों पक्ष आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत कठिन और व्यापक मोलभाव के बाद इस स्थिति तक पहुंची है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन फिलहाल भारत के पक्ष में है और अमेरिका इस असंतुलन को कम करना चाहता है।
कृषि बाजार बना प्रमुख मुद्दा
वार्ता में सबसे बड़ी अड़चन कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को माना जा रहा है। अमेरिका भारत के कृषि बाजार में अधिक पहुंच चाहता है, जबकि भारत डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी घरेलू जरूरतों और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त रियायत देने को तैयार नहीं दिख रहा है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर भी हाल में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से बातचीत के बाद संकेत दे चुके हैं कि तत्काल समझौते की संभावना कम है। दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है।
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा के दौरान भी व्यापार समझौता प्रमुख मुद्दा रहा था। अब दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत में उच्चस्तरीय संपर्क महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीतारमण के बयान से संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका समझौते के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में किसी बड़े समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने रुख में संतुलन बनाना होगा।




