मंगलुरु। बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन की दिशा में रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसुरु मंडल ने पश्चिमी घाट के चुनौतीपूर्ण सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट सेक्शन में वंदे भारत ट्रेन का फील्ड ट्रायल शुरू किया है। ट्रायल का उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस मार्ग पर ट्रेन की सुरक्षा और परिचालन क्षमता का आकलन करना है।
20 कोच की ट्रेन से परीक्षण
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रायल के लिए 20 कोच वाली वंदे भारत रेक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने तैयार किया है। ट्रेन में स्वचालित आपातकालीन ब्रेकिंग प्रणाली भी लगाई गई है, जिसकी कार्यक्षमता को विशेष रूप से जांचा जा रहा है।
ट्रायल के दौरान ब्रेकिंग, त्वरण, स्थिरता और अन्य परिचालन मानकों की जांच की जा रही है। रेलवे के अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) के अधिकारी भी परीक्षण प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। परीक्षण कई दिनों तक जारी रहने की योजना है।
पश्चिमी घाट का कठिन सेक्शन
बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग का सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड हिस्सा पश्चिमी घाट से होकर गुजरता है। यह करीब 55 किलोमीटर लंबा चुनौतीपूर्ण घाट सेक्शन है, जहां तीखी ढलान, सुरंगें और घुमावदार मोड़ ट्रेन संचालन को कठिन बनाते हैं। इस हिस्से में लगभग 1:50 का तीखा ग्रेडिएंट और बड़ी संख्या में सुरंगें व पुल हैं।
रेलवे पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आधुनिक सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत इस कठिन मार्ग पर निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक संचालित हो सकती है। ट्रायल के सफल रहने पर बेंगलुरु-मंगलुरु के बीच वंदे भारत सेवा शुरू करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
यह सेवा शुरू होने से कर्नाटक के तटीय क्षेत्र और राज्य की राजधानी के बीच तेज रेल संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





