नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल में नगर पालिका प्रशासन और सभासदों के बीच का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नैनीताल नगर पालिका द्वारा बिना बोर्ड बैठक बुलाए ही ‘लेकब्रिज चुंगी’ का 21 महीने का ठेका एकतरफा तरीके से अलॉट (आबंटित) करने पर भारी बवाल शुरू हो गया है। पालिकाध्यक्ष के इस फैसले के खिलाफ स्थानीय जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ पालिका के आठ सभासदों ने भी मोर्चा खोल दिया है।
बिना बोर्ड बैठक बुलाए ठेका देने का आरोप
पालिका सभागार में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान आठ सभासदों ने इस पूरे मामले को पालिकाध्यक्ष का मनमाना और एकतरफा निर्णय करार दिया। सभासदों का आरोप है कि 21 महीने की लंबी अवधि के लिए इतना महत्वपूर्ण ठेका देने से पहले नगर पालिका की बोर्ड बैठक बुलाई जानी अनिवार्य थी, लेकिन पालिकाध्यक्ष ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।
दोपहिया वाहनों पर ₹100 टैक्स लगाने से जन आक्रोश
इस निविदा (टेंडर) और इसकी शर्तों के तहत नैनीताल में प्रवेश करने वाले बाहरी दोपहिया वाहनों से ₹100 प्रवेश शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया था। सभासदों का कहना है कि यदि यह मामला बोर्ड बैठक में लाया जाता, तो वे जनहित को ध्यान में रखते हुए दोपहिया वाहनों से शुल्क न लेने समेत कई महत्वपूर्ण संशोधनों पर निर्णय ले सकते थे। बिना चर्चा के लिए गए इस निर्णय से आम जनता में भारी आक्रोश है।
चेतावनी और धरने को भी किया दरकिनार
पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ सभासद जीतेंद्र पांडे ‘जीनू’ ने पूरी क्रोनोलॉजी बताते हुए कहा कि 1 जून को इस ठेके के लिए निविदा निकाली गई थी, जिसे 10 जून को खोला जाना था। इस बीच 2 जून, 9 जून और फिर 20 जून को सभासदों ने पालिकाध्यक्ष को पत्र लिखकर बोर्ड बैठक बुलाने की लगातार मांग की और धरना देने की चेतावनी भी दी थी।
इसके बाद सभासदों ने कमिश्नर और जिलाधिकारी (DM) को भी पत्र भेजा। 22 जून को जब सभासदों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया, तब जाकर 23 जून को पालिकाध्यक्ष ने लिखित आश्वासन दिया कि बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद 7 जुलाई को तय की गई बोर्ड बैठक स्थगित कर दी गई और उसे 18 जुलाई के लिए प्रस्तावित किया गया था। लेकिन आरोप है कि पालिकाध्यक्ष ने नियमों को ताक पर रखकर 14 जुलाई को ही गुपचुप तरीके से लेकब्रिज का ठेका अलॉट कर दिया, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की हार है।
जांच और बोर्ड भंग करने की उठी मांग
पूर्व पालिकाध्यक्ष और मल्लीताल बाजार वार्ड के सभासद मुकेश जोशी ‘मंटू’ ने साफ किया कि पालिका नियमावली के तहत निविदा की शर्तों में किसी भी बदलाव या अंतिम निर्णय से पहले बोर्ड बैठक की सहमति जरूरी होती है। उन्होंने मांग की है कि कुमाऊं कमिश्नर और जिलाधिकारी नैनीताल को उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड नगर पालिका अधिनियम की धारा 34 के तहत इस मामले का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और नियमों की अनदेखी करने पर इस बोर्ड को भंग करने की भी मांग उठाई है।





