नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और आपदा के बीच भारत की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री और सहायता को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय मीडिया को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नेपाल की मदद को लेकर खबरें दिखाते समय भारत को अपनी सहायता का प्रचार करने या उसका श्रेय लेने से बचना चाहिए।
थरूर ने कहा कि नेपाल इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। ऐसे में भारत की ओर से दी जा रही सहायता को मानवीय सहयोग के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि इसका इस्तेमाल भारत की ताकत या उदारता दिखाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया से भी इस संवेदनशील स्थिति में संयम बरतने की अपील की।
मदद को मानवीय नजरिए से देखने की जरूरत
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान–माल का नुकसान हुआ है। कई इलाकों में सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है तथा बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे मुश्किल समय में भारत सहित कई स्तरों पर राहत एवं बचाव प्रयास किए जा रहे हैं।
थरूर का कहना है कि पड़ोसी देश के साथ भारत के संबंध केवल राजनीतिक या रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंध रहे हैं। इसलिए संकट के समय नेपाल की सहायता करना स्वाभाविक पड़ोसी धर्म के रूप में देखा जाना चाहिए।
मीडिया कवरेज में संवेदनशीलता की अपील
कांग्रेस सांसद ने मीडिया से अपील की कि राहत सामग्री या बचाव कार्यों की खबरों को इस तरह प्रस्तुत न किया जाए, जिससे नेपाल को यह महसूस हो कि भारत उसकी मदद के बदले प्रचार चाहता है। उन्होंने सहायता को लेकर अनावश्यक दावे और आत्मप्रशंसा से बचने पर जोर दिया।
थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब नेपाल में बाढ़ से हुए नुकसान और राहत अभियानों पर भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।





