नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार को फिर शुरू हुई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत चर्चा चाहती है, लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष से हंगामा छोड़कर बहस में भाग लेने की अपील की।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की बैठक में नीट पेपर लीक को “घोर पाप” करार दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक रोकना केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि सभी राज्यों की साझा जिम्मेदारी है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि केवल चर्चा की पेशकश पर्याप्त नहीं है। उसका आग्रह है कि प्रधानमंत्री स्वयं संसद में इस मुद्दे पर बयान दें और सरकार परीक्षा प्रणाली में हुई कथित चूक की जवाबदेही तय करे। इसी मांग को लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
सरकार का दावा है कि पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के उपाय किए जा रहे हैं। वहीं, विपक्ष छात्रों के हितों का हवाला देते हुए सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगा रहा है। ऐसे में संसद के मौजूदा सत्र में नीट पेपर लीक का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है।





