उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई आपदा के मद्देनज़र राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस आपरेशन की समीक्षा को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें आर्मी, एयरफोर्स, आईटीबीपी, बीआरओ, मौसम विभाग और एनडीआरएफ के अधिकारी दिल्ली से वर्चुअली जुड़े।
सड़क बहाली का कार्य तेज़, हर्षिल तक तीन दिन में खुलने की उम्मीद
बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने जानकारी दी कि भारी बारिश और भूस्खलन से हर्षिल मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि एक पुल भी बह गया है। बीआरओ की टीमें लगातार मशीनरी के साथ कार्य में जुटी हैं और अगले तीन दिनों में हर्षिल तक संपर्क बहाली की उम्मीद है।
चिनूक हेलिकॉप्टर से चला रेस्क्यू ऑपरेशन
अब तक चिनूक हेलिकॉप्टर से दो चरणों में 39 लोगों को सुरक्षित जौलीग्रांट एयरपोर्ट लाया गया है। पहले चरण में 29 और दूसरे चरण में 10 लोग एयरलिफ्ट किए गए। एयरपोर्ट पर उनका मेडिकल चेकअप कराया गया और आगे की यात्रा के लिए सरकार की ओर से बसों की व्यवस्था की गई।
274 लोग सुरक्षित हर्षिल पहुंचाए गए
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अब तक 274 लोगों को गंगोत्री व आसपास के क्षेत्रों से सुरक्षित हर्षिल लाया गया है। इनमें गुजरात के 131, महाराष्ट्र के 123, मध्यप्रदेश के 21, उत्तरप्रदेश के 12, राजस्थान के 6, दिल्ली के 7, असम व कर्नाटक से 5-5, तेलंगाना से 3 और पंजाब से एक व्यक्ति शामिल हैं। सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें उत्तरकाशी से देहरादून लाया जा रहा है।
वाडिया संस्थान करेगा आपदा का अध्ययन
धराली क्षेत्र में आई आपदा के वैज्ञानिक विश्लेषण हेतु वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की टीम को भेजा जाएगा। संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने बताया कि टीम को मार्ग बहाल होने और परिस्थितियां सामान्य होने पर मौके पर भेजा जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज़
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा भटवाड़ी के अंतिम संपर्क मार्ग तक पहुंचे और सरकार पर राहत कार्यों को लेकर केवल ‘दावे’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेना और आईटीबीपी के जवान ही असली काम कर रहे हैं, जबकि नेटवर्क बाधित होने के कारण लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
पहाड़ काटकर बनाया जा रहा वैकल्पिक मार्ग
धराली मार्ग पर मनारी से दो किमी आगे सड़क नदी में समा गई है। बीआरओ द्वारा पहाड़ काटकर वैकल्पिक मार्ग बनाने का कार्य तीसरे दिन भी जारी रहा।
आपदा के इस कठिन समय में सेना, एनडीआरएफ, बीआरओ और राज्य प्रशासन के समन्वित प्रयासों से राहत कार्यों में तेजी लाई जा रही है, ताकि सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके और जीवन सामान्य किया जा सके।





