ढाका। तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध के बीच बांग्लादेश के रुख में नरमी के संकेत मिले हैं। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने कहा है कि तीस्ता जल विवाद की वजह से भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध प्रभावित नहीं होने चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों से अलग रखकर सुलझाने की जरूरत बताई।
तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसका पानी विशेष रूप से कृषि और सिंचाई के लिए अहम है। दोनों देशों के बीच तीस्ता जल बंटवारे पर लंबे समय से बातचीत होती रही है, लेकिन अब तक स्थायी समझौता नहीं हो सका है। बांग्लादेश लगातार नदी के पानी में अपने हिस्से की मांग करता रहा है।
तीस्ता को लेकर बांग्लादेश वैकल्पिक विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। इनमें चीन की संभावित भागीदारी वाली तीस्ता परियोजना प्रमुख है। इस परियोजना के जरिये नदी के जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की योजना पर चर्चा होती रही है। हालांकि, ढाका ने संकेत दिया है कि इस परियोजना का मुद्दा भारत के साथ संबंधों में बाधा नहीं बनना चाहिए।
बांग्लादेशी मंत्री ने तीस्ता विवाद को गंगा जल बंटवारा समझौते से अलग विषय बताया है। दोनों देशों के बीच गंगा जल समझौता भी महत्वपूर्ण चरण में है और इसकी अवधि 2026 में समाप्त होनी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जल संसाधनों पर सहयोग दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में अहम भूमिका निभाता है।
तीस्ता को लेकर बांग्लादेश का बदला रुख ऐसे समय सामने आया है, जब ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशें चल रही हैं। बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ व्यावहारिक और पारस्परिक हितों पर आधारित संबंधों पर जोर दे रही है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने के प्रयास भी तेज हुए हैं।
बांग्लादेश के ताजा रुख को भारत के साथ संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि, तीस्ता जल बंटवारे का स्थायी समाधान दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा।





