नई दिल्ली: जमीयत उलेमा–ए–हिंद के वरिष्ठ नेता मौलाना अरशद मदनी ने राष्ट्रीय स्तर पर गाए को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। मौलाना ने यह प्रस्ताव बकरीद के मौके पर रखा और इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण को महत्व बताया।
मौलाना मदनी ने कहा कि गाए का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व लंबे समय से भारतीय समाज में रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि गाए को राष्ट्रीय पशु बनाने से न केवल उसकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
इस दौरान उन्होंने देशवासियों से अपील की कि धार्मिक त्योहारों और परंपराओं का सम्मान करते हुए सभी को एकजुटता और सौहार्द बनाए रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विवाद या मतभेद को बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि यह समाज में पारंपरिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए है।
ज्ञात हो कि मौलाना अरशद मदनी अक्सर सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर विचार साझा करते रहते हैं और समाज में सामंजस्य बनाए रखने की पहल करते हैं। उनका यह प्रस्ताव फिलहाल राजनीतिक या सरकारी निर्णय का हिस्सा नहीं बना है, लेकिन इसके आसपास चर्चा और विचार–विमर्श जारी है।
सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व के रूप में मौलाना मदनी का यह कदम गाए के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे प्रस्तावों से सामाजिक चेतना और पारंपरिक मूल्यों पर ध्यान आकर्षित करने में मदद मिलती है।




