Top 5 This Week

Related Posts

जनगणना ड्यूटी से इनकार नहीं कर सकते शिक्षक, हाई कोर्ट ने माना स्कूल ड्यूटी का हिस्सा

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने जनगणना कार्य में लगाए गए शिक्षकों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी शिक्षक को जनगणना कार्य के लिए प्रतिनियुक्त किया जाता है तो इसे उसकी आधिकारिक स्कूल ड्यूटी का हिस्सा माना जाएगा और शिक्षक इस जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकते। 

न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने कहा कि जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों की सेवाएं लेने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को काम की तारीख, समय और स्थान की जानकारी शिक्षण संस्थान के प्रमुख को देनी होगी। इसके बाद संस्थान प्रमुख को शिक्षक को जनगणना ड्यूटी के लिए कार्यमुक्त करना होगा।

पढ़ाई प्रभावित न होने की व्यवस्था

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षकों को जनगणना कार्य के लिए भेजते समय स्कूल प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। कोर्ट ने जनगणना कार्य और शिक्षकों की नियमित शैक्षणिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।

पीठ ने जनगणना अधिनियम की धारा 15A का उल्लेख करते हुए कहा कि जनगणना ड्यूटी पर तैनात शिक्षक को स्कूल ड्यूटी पर ही माना जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना कार्य करने के कारण कर्मचारी की नौकरी, सेवा शर्तों या पदोन्नति पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

सरकार ने वापस लिया था आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को बताया कि उसने वह अधिसूचना वापस ले ली है, जिसमें शिक्षकों को स्कूल समय के बाद और सप्ताहांत में जनगणना कार्य करने का निर्देश दिया गया था। इससे पहले अदालत ने जनगणना और शिक्षण कार्य के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया था।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जनगणना के लिए विधिवत प्रतिनियुक्त किए गए शिक्षक अपनी ड्यूटी से इनकार नहीं कर सकते। साथ ही, स्कूल प्रशासन को शिक्षकों की अनुपस्थिति में छात्रों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।

Popular Articles