नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस संबंध में 14 अक्टूबर 2026 को जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। दिल्ली पुलिस के आदेश के खिलाफ दायर इस याचिका के बाद मामला कानूनी स्तर पर पहुंच गया है।
दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया था। इसके बाद यहां धरना देने और विरोध-प्रदर्शन करने पर रोक लग गई। इस फैसले के तहत प्रदर्शनों के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं।
तीन वैकल्पिक स्थल किए गए निर्धारित
जंतर-मंतर की जगह अब रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन स्थलों के रूप में चुना गया है। इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था की गई है।
जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में इसे प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला चर्चा में है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलने और स्थल को निर्धारित सूची से हटाए जाने के बाद इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पुलिस के आदेश को चुनौती दी गई है।
इस मामले में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी। अदालत का रुख यह स्पष्ट करने में अहम होगा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की पुरानी व्यवस्था बहाल होगी या वैकल्पिक स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था जारी रहेगी।





