देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इस वर्ष अब तक 58.40 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम और हेमकुंड साहिब में दर्शन कर चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब 10 लाख अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। यात्रा के समापन तक यह संख्या 65 लाख के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
रोजाना पहुंच रहे करीब 35 हजार श्रद्धालु
चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। यात्रा के पहले चरण में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहुंचे। मानसून के दौरान यात्रा की रफ्तार कुछ धीमी हुई, लेकिन सितंबर के मध्य से दूसरे चरण में फिर तेजी देखने को मिली।
मौसम साफ होने के बाद इन दिनों प्रतिदिन करीब 35 हजार श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं।
पिछले साल 48.32 लाख श्रद्धालुओं ने किए थे दर्शन
पिछले वर्ष पूरे यात्रा काल में 48,31,905 श्रद्धालुओं ने चारधाम और हेमकुंड साहिब में दर्शन किए थे। वहीं, 2026 में 27 अक्टूबर तक यह संख्या बढ़कर 58,40,451 पहुंच गई है। इस तरह यात्रा अभी समाप्त भी नहीं हुई है और पिछले वर्ष का रिकॉर्ड काफी पीछे छूट चुका है।
नवंबर में बंद होंगे धामों के कपाट
चारधाम यात्रा के समापन की तारीखें भी निर्धारित हैं। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर तथा बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।
यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि कपाट बंद होने तक श्रद्धालुओं की कुल संख्या 65 लाख से अधिक हो सकती है।
बेहतर व्यवस्थाओं से बढ़ा श्रद्धालुओं का उत्साह
चारधाम यात्रा में बढ़ती संख्या के पीछे अनुकूल मौसम, बेहतर यातायात प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और व्यापक प्रचार-प्रसार को प्रमुख कारण माना जा रहा है। यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आमद से होटल, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय कारोबार को लाभ मिल रहा है।
इस वर्ष चारधाम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उत्तराखंड को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई है।





