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कर्नाटक में सरकारी परिसरों के इस्तेमाल पर लगेगी रोक, अनुमति लेना होगा जरूरी

बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने सरकारी भवनों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर नए नियम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ‘कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रिमाइसेज एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित कानून के तहत निजी व्यक्तियों, संगठनों, संस्थाओं, संघों और सोसायटियों को सरकारी परिसरों या सार्वजनिक संपत्तियों में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी।

सरकार के अनुसार, विधेयक का उद्देश्य सरकारी जमीन, भवन, खेल मैदान, पार्क, सड़क और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का दुरुपयोग रोकना तथा इनके जिम्मेदाराना इस्तेमाल के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। नियमों के उल्लंघन या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में दंड का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

RSS को लेकर सियासी चर्चा तेज

विधेयक को लेकर राजनीतिक चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि इसका असर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मैदानों में होने वाली गतिविधियों पर पड़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, पंजीकृत और अपंजीकृत दोनों तरह के संगठनों को सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेनी होगी।

राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खरगे लंबे समय से सरकारी परिसरों में RSS की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने संगठन की गतिविधियों और कानूनी स्थिति को लेकर पारदर्शिता की मांग भी की है।

हालांकि, खरगे ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य किसी विशेष संगठन को निशाना बनाना नहीं है। उनके मुताबिक, विधेयक का मकसद सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा, जवाबदेही और सार्वजनिक हित सुनिश्चित करना है। विधेयक को विधानसभा के आगामी सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा।

 

 

 

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