जयपुर: उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपित आठ लोगों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने आरोपियों की याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनके खिलाफ आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा जारी रहेगा। अदालत ने विशेष एनआईए कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत को मिनी ट्रायल करने की जरूरत नहीं होती। इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।
आतंकवादी संगठन से संबंध नहीं होने की दी थी दलील
आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि उनके किसी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं है। साथ ही, बरामद वीडियो और कथित धमकियों के आधार पर आतंकवाद से जुड़ी धाराएं लगाने को भी चुनौती दी गई थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को आरोपियों को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि साजिश और उससे जुड़े तथ्यों का मूल्यांकन मुकदमे की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। साजिश का प्रत्यक्ष सबूत नहीं होना अपने आप में आरोपियों को आरोपमुक्त करने का आधार नहीं हो सकता।
28 जून 2022 को हुई थी कन्हैयालाल की हत्या
गौरतलब है कि 28 जून 2022 को उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की उनकी दुकान में घुसकर धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट साझा करने को लेकर विवाद के बाद इस वारदात को अंजाम दिया गया था। आरोप है कि मोहम्मद रियाज अत्तारी और मोहम्मद गौस ने इस घटना को अंजाम दिया था और इसका वीडियो भी बनाया था।
इस मामले में मोहम्मद रियाज, मोहम्मद गौस समेत आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, भारतीय दंड संहिता और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए गए हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी आठ आरोपियों के खिलाफ विशेष एनआईए अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी। अदालत ने फिलहाल आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।





