नई दिल्ली। एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (कनिष्क) बम विस्फोट की बरसी के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ और अडिग नीति को दोहराते हुए कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर “जीरो टॉलरेंस” और सामूहिक कार्रवाई जरूरी है।
विदेश मंत्री ने इस अवसर पर 1985 की उस भयावह घटना को याद किया, जिसमें एयर इंडिया की कनिष्क फ्लाइट को आतंकवादी हमले में निशाना बनाया गया था। इस हमले में सैकड़ों निर्दोष यात्रियों की जान गई थी, जिसे उन्होंने मानवता पर किया गया एक क्रूर और अस्वीकार्य अपराध बताया। जयशंकर ने कहा कि यह घटना आतंकवाद की भयावहता और इसके खिलाफ निरंतर संघर्ष की आवश्यकता को हमेशा याद दिलाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है और देश ने कई दशकों तक इस चुनौती का सामना किया है। ऐसे में भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही इसे किसी भी तरह से उचित ठहराया जा सकता है।
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और समन्वित कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलनी चाहिए और आतंक के सभी रूपों के खिलाफ कठोर नीति अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए देशों के बीच सहयोग और विश्वास बेहद आवश्यक है। आतंकवाद जैसी साझा चुनौती का मुकाबला केवल एकजुट प्रयासों से ही संभव है।
विदेश मंत्री के इस संदेश को भारत की आतंकवाद के खिलाफ लगातार मजबूत हो रही विदेश नीति और कूटनीतिक रुख के रूप में देखा जा रहा है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ कठोर वैश्विक नीति की मांग उठा रहा है।





