नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही याचिकाकर्ता को केंद्र के जवाब के बाद दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी गई। अदालत ने कहा कि इसके बाद मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका में एनआईए अधिनियम, 2008 को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ‘पुलिस’ राज्य सूची का विषय है, जबकि यह अधिनियम केंद्र सरकार को राज्यों की सहमति के बिना भी कुछ मामलों में एनआईए से जांच कराने का अधिकार देता है, जिससे संघीय ढांचे पर असर पड़ता है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। अदालत ने तब कहा था कि याचिका में उठाए गए संवैधानिक प्रश्न महत्वपूर्ण हैं और इन पर विस्तार से विचार किया जाना आवश्यक है।
अब केंद्र सरकार के जवाब और अन्य पक्षों की दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट एनआईए अधिनियम की संवैधानिक वैधता से जुड़े मुद्दों पर आगे सुनवाई करेगा।





