उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पिछले करीब एक वर्ष में प्रदेश में 4,53,459 मतदाता कम हो गए हैं, जबकि लगभग नौ लाख मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार प्रदेश में मतदाताओं के सत्यापन और मैपिंग का काम लंबे समय से चल रहा है। बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब तक संपर्क में नहीं आए हैं। ऐसे मतदाताओं में स्थानांतरित हो चुके, अनुपस्थित या मृतक मतदाता भी शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार राज्य में लाखों मतदाताओं की मैपिंग नहीं होने से आगामी एसआईआर प्रक्रिया में उनके वोट पर संकट खड़ा हो सकता है। जिन मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग पूरी नहीं होगी, उन्हें दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। नोटिस का जवाब न देने पर मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई भी संभव है।
चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और निष्क्रिय मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके लिए राजनीतिक दलों को भी बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने को कहा गया है। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपने बीएलओ से संपर्क करें और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।
प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर यह अभियान आने वाले चुनावों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि मैपिंग प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न कटे।





