संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करते हुए कहा है कि परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को वैधता देने या राजनीतिक हित साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत का यह बयान पाकिस्तान और चीन की ओर परोक्ष रूप से संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर बुधवार को हुई खुली बहस में संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योजाना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता अपने साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां लेकर आती है। इसे संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने आतंकियों और आतंकी संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करने या उससे हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने कहा कि किसी आतंकी को प्रतिबंध सूची से हटाने या किसी संगठन को केवल राजनीतिक आधार पर आतंकी घोषित करने के प्रयास नहीं होने चाहिए। ऐसे फैसलों के लिए स्पष्ट मानदंड और पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण जरूरी हैं।
फैसलों की प्रक्रिया पर भी सवाल
भारत लंबे समय से UNSC की प्रतिबंध समितियों के कामकाज में गोपनीयता को लेकर चिंता जताता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि जहां प्रतिबंध सूची में शामिल करने या हटाने के फैसले सार्वजनिक किए जाते हैं, वहीं प्रस्तावों को खारिज करने या उन्हें तकनीकी स्तर पर रोकने की जानकारी सीमित देशों तक ही रहती है। भारत ने ऐसी व्यवस्था को पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत बताया है।
भारत विशेष रूप से 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग करता रहा है। उसका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकियों को सूचीबद्ध करने के लिए पेश किए गए ठोस साक्ष्यों वाले प्रस्तावों को पर्याप्त कारण बताए बिना रोकना आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को कमजोर करता है।
चीन के रुख पर भी निशाना
भारत पहले भी पाकिस्तान स्थित आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल कराने के प्रयासों में अड़चनों का मुद्दा उठाता रहा है। चीन ने कई मौकों पर ऐसे प्रस्तावों पर रोक लगाई या उन्हें आगे बढ़ने से रोका है। इसी पृष्ठभूमि में भारत की ताजा टिप्पणी को चीन और पाकिस्तान पर परोक्ष दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
भारत ने सुरक्षा परिषद की सहायक संस्थाओं के अध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई और परिषद की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियम आधारित बनाने की आवश्यकता बताई।





