नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक जारी रहे संकट और आपूर्ति बाधित होने के बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा उपभोक्ताओं को इसके गंभीर प्रभावों से सफलतापूर्वक बचाया। उन्होंने कहा कि संकट के दौरान देश में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं होने दी गई और एलपीजी की आपूर्ति भी सुचारू बनी रही।
पुरी ने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान देखने को मिल रहा था, तब भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रखा। उनके मुताबिक, संकट के दौरान देश में पेट्रोल पंप खुले रहे और ऊर्जा की उपलब्धता बनी रही।
27 से बढ़कर 41 देशों से कच्चे तेल का आयात
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, संकट के दौरान भारत ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में तेजी से विविधता लाई। पहले जहां भारत 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, वहीं संकट के दौरान यह संख्या बढ़कर 41 हो गई। इसके साथ ही आयात टर्मिनलों की क्षमता भी बढ़ाई गई।
पुरी ने कहा कि भारत के पास अब 24 रिफाइनरियां, 47 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी तेल एवं गैस पाइपलाइन और एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप हैं। इन व्यवस्थाओं के जरिए देश में रोजाना करोड़ों उपभोक्ताओं तक ईंधन पहुंचाया जाता है।
बिना टोल के निकले भारतीय एलपीजी जहाज
पुरी ने बताया कि संकट के चरम दौर में, जब होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित थी, तब भारत के 12 से अधिक एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से वहां से निकाले गए। उन्होंने इसे संकट के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में ऐसे किसी भी भू-राजनीतिक संकट से निपटने के लिए देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयात व्यवस्था को और मजबूत करेगी। उन्होंने जोर दिया कि भारत का लक्ष्य ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित, स्थिर और उपभोक्ताओं के लिए सुलभ बनाए रखना है।





