देहरादून। उत्तराखंड में हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले को लेकर राज्य सरकार ने अब तक की सबसे कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। सरकार ने इस मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों सहित कई अफसरों पर सख्त कदम उठाते हुए उनके खिलाफ सेवा समाप्ति और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। यह कदम राज्य के प्रशासनिक इतिहास में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, हरिद्वार नगर निगम द्वारा ग्राम सराय क्षेत्र में कूड़ा डंपिंग साइट के पास स्थित लगभग 2.3 हेक्टेयर अनुपयुक्त भूमि को खरीदने में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। आरोप है कि इस जमीन की कीमत को बढ़ाने के लिए उसका भूमि उपयोग (लैंड यूज) बदलकर कृषि से व्यावसायिक किया गया और इसके बाद इसे लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जबकि इसकी वास्तविक कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक स्तर पर कई अनियमितताएं हुईं और निर्णय प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी, नगर आयुक्त सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई की थी, जिनमें दो आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, एक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है, जबकि अन्य पर ‘मेजर पेनल्टी’ की कार्रवाई प्रस्तावित है। इसके साथ ही कई अन्य अधिकारियों की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने और वेतन वृद्धि रोकने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई को सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ का हिस्सा बताते हुए कहा है कि सार्वजनिक धन और प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
इस कार्रवाई के बाद राज्य प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इसे उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक और उदाहरणात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।





