नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर–बैंक गठजोड़ से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि कुछ चुनिंदा होमबायर्स से समझौता कर लेने भर से सीबीआई जांच बंद नहीं होगी। अदालत ने कहा कि जब तक प्रत्येक प्रभावित खरीदार को या तो उसका फ्लैट नहीं मिल जाता या पूरी धनराशि वापस नहीं मिल जाती, तब तक जांच जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बिल्डरों द्वारा सीमित मामलों का निपटारा कर जांच से बचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने दोहराया कि हजारों परिवार वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं और उनके साथ न्याय सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि जांच के दौरान कई बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यदि बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के बीच मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं तो उनकी निष्पक्ष और व्यापक जांच आवश्यक है। इस मामले में संबंधित बैंकों से अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि जांच को किसी भी स्तर पर अधूरा न छोड़ा जाए और सभी मामलों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य केवल दोष तय करना नहीं, बल्कि उन सभी होमबायर्स को राहत दिलाना है, जिन्होंने वर्षों पहले घर खरीदने के लिए अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश की थी।
यह मामला एनसीआर के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्टों से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर बिल्डरों ने बैंकों के साथ मिलकर खरीदारों से धन लिया, लेकिन समय पर फ्लैट नहीं सौंपे। इसके कारण हजारों खरीदार वर्षों से ईएमआई और किराये का दोहरा बोझ उठाने को मजबूर हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को होमबायर्स के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रभावित खरीदारों के साथ पूर्ण न्याय होने तक जांच प्रक्रिया जारी रहेगी और किसी भी दोषी को कानून से राहत नहीं मिलेगी।





