नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि देश की न्यायपालिका की ताकत काफी हद तक उसके न्यायाधीशों, वकीलों, विद्वानों और प्रशासकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी के कानूनी पेशेवरों के पीछे शिक्षकों की एक पीढ़ी का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कानून, न्याय और कानूनी शिक्षा पर आयोजित मासिक व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रोफेसर डॉ. रणबीर सिंह को पहले वार्षिक ‘सुप्रीम कोर्ट न्याय शिक्षा सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में सीजेआई ने कहा कि संविधान को अक्सर अधिकारों, शक्तियों की सीमाओं और शासन की संरचनाओं के संदर्भ में देखा जाता है। हालांकि, संविधान का उद्देश्य समाज में लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें गरिमा व समानता के साथ अवसर उपलब्ध कराना भी है।
उन्होंने कहा कि कानून का स्वरूप लगातार विकसित हो रहा है और नए सवाल सामने आ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक न्यायाधीश, वकील और विद्वान किसी न किसी रूप में कानून का विद्यार्थी बना रहता है।
शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी पेशेवरों की प्रत्येक पीढ़ी के पीछे ऐसे शिक्षक होते हैं, जिन्होंने उन्हें कानून की समझ, उसकी कार्यप्रणाली और मूल्यों से परिचित कराया तथा स्वतंत्र एवं आलोचनात्मक सोच के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने अपने पिता का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपना कार्यजीवन शिक्षक के रूप में बिताया। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने अपने पिता के माध्यम से शिक्षण के लिए आवश्यक अनुशासन, तैयारी और प्रतिबद्धता को करीब से देखा है।
कार्यक्रम में प्रोफेसर रणबीर सिंह ने ‘संविधान को अवसर के चार्टर के रूप में: लोकतंत्र, उद्यम और समावेशी राष्ट्र-निर्माण’ विषय पर व्याख्यान दिया।




