नई दिल्ली। केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना देश में विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देने में सफल रही है। सरकार ने संसद में जानकारी दी कि 31 मार्च 2026 तक पीएलआई योजना के तहत 14 प्रमुख क्षेत्रों में 2.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही इस योजना के माध्यम से 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
सरकार के अनुसार पीएलआई योजना का उद्देश्य देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, चिकित्सा उपकरण, सौर पीवी मॉड्यूल, विशेष इस्पात तथा अन्य रणनीतिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार पीएलआई योजनाओं के प्रभाव से देश में उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत हुई है, निर्यात को बढ़ावा मिला है और कई क्षेत्रों में नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना हुई है। सरकार का कहना है कि योजना के कारण निजी निवेश में तेजी आई है और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली है।
सरकार ने यह भी बताया कि पीएलआई योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में स्वीकृत परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजन और तकनीकी निवेश को बढ़ावा मिला है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिली है। योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएलआई योजना के तहत लगातार बढ़ता निवेश आने वाले वर्षों में औद्योगिक उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।





