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‘वसुधैव कुटुंबकम’ ही वैश्विक शांति का मार्ग, उत्तर मैसेडोनिया की संसद में राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने उत्तर मैसेडोनिया दौरे के दौरान वहां की संसद को संबोधित करते हुए भारत की प्राचीन विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को वैश्विक शांति और सहयोग का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब दुनिया संघर्षों और आर्थिक विभाजन की चुनौतियों का सामना कर रही है, तब देशों को दीवारें नहीं बल्कि पुल बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत उत्तर मैसेडोनिया को कोई दूरस्थ देश नहीं, बल्कि स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक व्यवस्था का महत्वपूर्ण साझेदार मानता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच दो हजार वर्ष पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन व्यापार और सभ्यताओं के आदान-प्रदान ने दोनों क्षेत्रों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया दोनों लोकतांत्रिक मूल्य साझा करते हैं। संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं, बल्कि जनता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विश्वास की संरक्षक हैं। राष्ट्रपति ने दोनों देशों के सांसदों के बीच नियमित संवाद और संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए युवा जनप्रतिनिधियों से नई दिल्ली और स्कोप्जे के बीच अनुभव साझा करने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दक्षिण-पूर्वी यूरोप विकास और नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। भारत इस क्षेत्र के साथ अपने आर्थिक, व्यापारिक और निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उत्तर मैसेडोनिया को भूमध्यसागर और मध्य यूरोप को जोड़ने वाला रणनीतिक प्रवेश द्वार बताते हुए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि कोई भी देश अकेले समृद्ध नहीं हो सकता। भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है और यही विचार वैश्विक शांति, सहयोग तथा साझा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने दोनों लोकतांत्रिक देशों से मिलकर भविष्य की ऐसी साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया, जो दोनों देशों के साथ-साथ विश्व समुदाय के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो।

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