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ब्रह्मोस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, निशांत अग्रवाल की बरी किए जाने के फैसले को यूपी सरकार ने दी चुनौती

नई दिल्ली। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व इंजीनियर निशांत अग्रवाल को जासूसी के आरोपों से बरी किए जाने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले की अब सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने निशांत अग्रवाल को जासूसी और साइबर आतंकवाद जैसे गंभीर आरोपों से राहत देकर त्रुटि की है। याचिका में हाई कोर्ट के एक दिसंबर 2025 के फैसले को निरस्त करने की मांग की गई है।

निशांत अग्रवाल को वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश एटीएस और सैन्य खुफिया एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पाकिस्तान से जुड़े फर्जी सोशल मीडिया खातों के संपर्क में आकर ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना से संबंधित संवेदनशील जानकारी साझा की। इसके बाद नागपुर की एक विशेष अदालत ने 2024 में उन्हें जासूसी और साइबर आतंकवाद के आरोपों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने बाद में साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष जासूसी और साइबर आतंकवाद के आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। अदालत ने अधिकांश गंभीर आरोपों से अग्रवाल को बरी कर दिया था और केवल आधिकारिक दस्तावेजों को लापरवाही से अपने पास रखने से संबंधित अपराध को बरकरार रखा था।

अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में यह तय करेगा कि हाई कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला विधिसम्मत था या नहीं। इस मामले को देश की सुरक्षा और संवेदनशील रक्षा सूचनाओं की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला माना जा रहा है।

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