नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को हंगामे और गतिरोध के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा की कार्यवाही ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गान के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद सदन में मौजूद रहे।
सत्र के अंतिम दिन भी सदन में विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान खड़े होने की अपील की। इसके बाद करीब 3 मिनट 10 सेकंड के पूर्ण ‘वंदे मातरम’ का गायन हुआ। सभी सांसद इस दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहे और कई सदस्यों ने गीत के साथ स्वर भी मिलाया।
सरकार-विपक्ष में बना रहा गतिरोध
20 जुलाई से शुरू हुआ मानसून सत्र लगातार राजनीतिक टकराव का गवाह रहा। विपक्ष की ओर से छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग की गई। गृह मंत्री अमित शाह ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा में हिस्सा लेने की पेशकश की थी, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर कायम रहा। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
हंगामे के बावजूद सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही। हालांकि, लगातार व्यवधान के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ और कई निर्धारित कार्य पूरे नहीं हो सके।
लोकसभा के बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह संसद का मानसून सत्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के बीच समाप्त हुआ। अंतिम दिन ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गान ने सत्र के समापन को एक विशेष प्रतीकात्मक स्वरूप दिया।




