नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस से जुड़े व्यापार को लेकर नीति पर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार हासिल किया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। इसी बीच ट्रंप प्रशासन बेलारूस से पोटाश खरीदने के लिए बड़े समझौते पर बातचीत कर रहा है। बेलारूस रूस का करीबी सहयोगी है।
अमेरिका के नए कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और इसलिए इस प्रावधान के संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा है। हालांकि, कानून के तहत यह टैरिफ स्वतः लागू नहीं हुआ है; इसे लागू करने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के पास है।
बेलारूस से पोटाश खरीदने की तैयारी
इसी दौरान ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका बेलारूस से पोटाश खरीदने के लिए एक बड़े समझौते पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बेलारूस से मिलने वाला पोटाश कनाडा से मौजूदा खरीद की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकता है। पोटाश कृषि में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण उर्वरक है।
बेलारूस रूस का प्रमुख सहयोगी है और उस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध भी रहे हैं। बेलारूस समुद्र से सीधे जुड़ा देश नहीं है, इसलिए वहां से बड़े पैमाने पर पोटाश निर्यात के लिए रूस के रास्ते या बंदरगाहों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इस वजह से प्रस्तावित समझौते को लेकर अमेरिका के सहयोगी देशों और विशेषज्ञों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
भारत ने अमेरिकी दबाव के बीच कहा है कि उसकी प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है और तेल की खरीद बदलती वैश्विक परिस्थितियों तथा उपलब्ध स्रोतों के आधार पर की जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत का रूसी तेल आयात घटकर करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, फिर भी रूस भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
रूसी तेल को लेकर अमेरिका की नीति और बेलारूस से पोटाश खरीद की प्रस्तावित योजना के कारण वाशिंगटन के व्यापार एवं प्रतिबंध संबंधी रुख की निरंतरता पर बहस तेज हुई है।




