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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नए महाभियोग प्रस्ताव की होगी नियमों के तहत जांच, ओम बिरला ने दिया बयान

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए यदि विपक्ष की ओर से नया प्रस्ताव लाया जाता है, तो उस पर निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार विचार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव संसद में आने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिरला ने गुरुवार को संसद में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। उनसे विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नए महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया भी निर्धारित है और उसी के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।

एसआईआर को लेकर विपक्ष का विरोध

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों का मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया है। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और संबंधित कानून में बदलाव की मांग भी की है।

विपक्ष पहले भी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए दो बार नोटिस दे चुका है। पहली बार दिए गए नोटिस लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में खारिज कर दिए गए थे, जबकि दूसरी बार दिए गए नोटिस राज्यसभा में लंबित हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

संविधान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है। आरोपों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत समिति गठित किए जाने का भी प्रावधान है।

ओम बिरला ने कहा कि यदि विपक्ष नया प्रस्ताव लाता है, तो उस पर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल नए प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

संसद के विशेष सत्र पर भी पूछे गए सवाल

संवाददाता सम्मेलन के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावनाओं पर भी सवाल पूछा गया। इस पर बिरला ने कहा कि संसद का सत्र बुलाने और स्थगित करने की प्रक्रिया संविधान में निर्धारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाता है।

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