Top 5 This Week

Related Posts

मिशन पूरा होने तक ISRO वैज्ञानिक नहीं छोड़ सकेंगे परियोजना, अहम अभियानों के लिए सख्त हुए नियम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़े वैज्ञानिक अब परियोजना पूरी होने से पहले आसानी से इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति नहीं ले सकेंगे। अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने गगनयान समेत राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में काम कर रहे वैज्ञानिकों के लिए निकासी नियमों को सख्त कर दिया है।

अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार, महत्वपूर्ण मिशनों और परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के अनुरोध को अब सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय विभाग स्तर पर लिया जाएगा।

यह कदम ISRO में हाल के महीनों में वैज्ञानिकों के इस्तीफों की बढ़ती संख्या के बाद उठाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, गगनयान जैसे अहम अभियानों से जुड़े कई अनुभवी वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने के बाद परियोजनाओं की निरंतरता और विशेषज्ञता बनाए रखने को लेकर चिंता जताई गई थी।

नए निर्देशों के तहत केंद्र निदेशकों और यूनिट प्रमुखों को कहा गया है कि वे गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोधों को सीधे मंजूरी न दें। ऐसे सभी मामलों को आवश्यक टिप्पणी और सिफारिश के साथ अंतरिक्ष विभाग को भेजना होगा।

ISRO के प्रमुख अभियानों में शामिल वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता को रणनीतिक महत्व का माना जाता है। अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी कंपनियों और नए अवसरों के बीच अनुभवी वैज्ञानिकों को बनाए रखना संगठन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

हालांकि, ISRO की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वैज्ञानिकों के जाने के बावजूद प्रमुख मिशनों की प्रगति प्रभावित नहीं होगी और सभी महत्वपूर्ण परियोजनाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेंगी।

गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसे देश की अंतरिक्ष क्षमता के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और अंतरिक्ष विभाग का ध्यान मिशन से जुड़े अनुभवी वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को बनाए रखने पर केंद्रित है।

Popular Articles