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“कभी-कभी युद्ध का पहला मोर्चा सीमा नहीं, सड़क होती है” : राजनाथ सिंह ने BRO की भूमिका को सराहा

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आधुनिक युद्ध में अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक के साथ-साथ मजबूत बुनियादी ढांचे की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है जो सैनिकों को अग्रिम मोर्चे तक पहुंचाती है।

राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सीमा सड़क संगठन (BRO) के स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य के संघर्षों में सड़कें, पुल, सुरंगें, हवाई पट्टियां और अन्य रणनीतिक ढांचे सैन्य अभियानों की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध का परिणाम सैन्य क्षमता, सटीक हथियारों और आधुनिक तकनीक से तय होता है, लेकिन इन क्षमताओं को प्रभावी बनाने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा जरूरी है।

रक्षा मंत्री ने BRO के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने दुर्गम इलाकों में रणनीतिक महत्व की सड़कों और अन्य परियोजनाओं का निर्माण कर देश की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि सड़क बनाने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण प्रहरी है, जितना सीमा पर तैनात जवान।

उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ युद्ध की प्रकृति में तेजी से बदलाव आ रहा है। आधुनिक हथियार प्रणालियों और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार के बावजूद सैन्य बलों की त्वरित आवाजाही और रसद व्यवस्था के लिए आधारभूत ढांचा आवश्यक रहेगा।

राजनाथ सिंह ने BRO द्वारा नई तकनीकों को अपनाने और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रणनीतिक परियोजनाएं न केवल वर्तमान सुरक्षा जरूरतों को पूरा कर रही हैं, बल्कि आने वाले दशकों में देश की सामरिक तैयारियों को भी मजबूत करेंगी।

कॉन्क्लेव में सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीकी नवाचार और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में सड़क और संपर्क परियोजनाओं को लगातार गति दी जा रही है।

राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से सुरक्षा बलों की तैनाती, आपूर्ति और आपात प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा।

 

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