नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो सप्ताह तक दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत उत्तर एवं मध्य भारत के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की प्रगति पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्रभावित हुई है, जिससे बारिश का वितरण असंतुलित हो गया है। ऐसे में धान, कपास, सोयाबीन और दलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की समय पर बुवाई प्रभावित होने की आशंका है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में बारिश की कमी से कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। जिन इलाकों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां किसानों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है और वहां पर्याप्त वर्षा दर्ज की जा रही है। लेकिन उत्तर और मध्य भारत में बारिश की कमी कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश होने पर स्थिति में सुधार संभव है।
देश की लगभग आधी कृषि भूमि आज भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है। ऐसे में मानसून की धीमी चाल आने वाले दिनों में खाद्यान्न उत्पादन और बाजार की कीमतों को भी प्रभावित कर सकती है। सरकार और मौसम विभाग हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।





