वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास भी जारी हैं। एक ओर हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे कूटनीतिक स्तर पर बातचीत तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं।
हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए गुप्त वार्ताएं चल रही हैं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य संघर्ष को और बढ़ने से रोकना तथा किसी संभावित समझौते का रास्ता निकालना है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई के बावजूद दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध से बचना चाहते हैं। यही वजह है कि सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत दोनों साथ–साथ चल रहे हैं। क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की भी कोशिश है कि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं।
इस बीच, संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इन गुप्त शांति वार्ताओं पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल रहे तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, लेकिन फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।





