नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए/एफटीए) 15 जुलाई से प्रभावी हो गया है। इसके लागू होने के साथ ही भारत के लगभग 98-99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्कमुक्त (ड्यूटी-फ्री) प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है तथा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी।
समझौते का सबसे अधिक लाभ वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, रसायन और फार्मा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलेगा। शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पाद ब्रिटेन में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने और रोजगार सृजन को बल मिलने की संभावना है।
दूसरी ओर, ब्रिटेन से आने वाली कुछ वस्तुओं पर भी आयात शुल्क में चरणबद्ध कमी होगी। प्रीमियम कारों और स्कॉच व्हिस्की जैसी चुनिंदा ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि भारत ने डेयरी और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखकर घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे, विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।





