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भारत-कोरिया संबंधों में नए अध्याय का सूत्रपात: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच उच्च स्तरीय वार्ता; ‘शांति और स्थिरता’ के लिए साथ मिलकर चलेंगे दोनों देश

नई दिल्ली: भारत की राजकीय यात्रा पर आए दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्यूंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सोमवार को राजधानी दिल्ली में बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने ‘भारत-कोरिया बिजनेस लीडर्स डायलॉग’ में भी शिरकत की, जहाँ व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है, जिसे देखते हुए दोनों देशों का एक मंच पर आना वैश्विक कूटनीति के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

बिजनेस लीडर्स डायलॉग: आर्थिक प्रगति का नया खाका

द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने व्यापारिक जगत के दिग्गजों को संबोधित किया। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापारिक बाधाओं को दूर करना था।

  • सहयोग पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली ने भविष्य की तकनीकों, जैसे कि सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और रक्षा उत्पादन में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
  • आर्थिक साझेदारी: बिजनेस डायलॉग के दौरान भारतीय और कोरियाई कंपनियों के बीच कई संभावित समझौतों की रूपरेखा तैयार की गई, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी का ‘शांति संदेश’

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भारत और दक्षिण कोरिया के गठबंधन को दुनिया के लिए एक उम्मीद बताया।

  • शांति की पहल: प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में दुनिया जिस वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, उसमें भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी पूरी दुनिया को ‘शांति और स्थिरता’ का एक सशक्त संदेश दे रही है।
  • साझा लोकतांत्रिक मूल्य: उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून आधारित वैश्विक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, जो इस क्षेत्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है।

राष्ट्रपति ली ने जताया भारत का आभार

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्यूंग ने भारत द्वारा किए गए भव्य स्वागत और आतिथ्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

  • आत्मीयता का अनुभव: राष्ट्रपति ली ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी, भारत सरकार और यहाँ की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का आतिथ्य उनके लिए अविस्मरणीय है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: उन्होंने भारत को दक्षिण कोरिया का एक स्वाभाविक और भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा आने वाले दशकों के लिए दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगी।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति ली की यह यात्रा दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक रणनीति’ और भारत की ‘ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के बीच बढ़ते तालमेल का प्रमाण है।

  • रक्षा और सुरक्षा: बंद कमरे में हुई वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन को लचीला बनाने पर भी चर्चा हुई।
  • ग्लोबल पार्टनरशिप: इस बैठक के साथ ही भारत और दक्षिण कोरिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे न केवल एशिया, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

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