नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। संसद परिसर में हुई इस मुलाकात के बाद भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
करीब तीन दशक तक पंजाब की राजनीति में साथ रहे भाजपा और अकाली दल के रिश्ते वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गए थे। इसके बाद दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे। हालांकि हाल के महीनों में दोनों दलों के नेताओं के बीच बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों ने एक बार फिर गठबंधन की संभावनाओं को हवा दी है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात के दौरान पंजाब के राजनीतिक हालात और आगामी विधानसभा चुनावों पर चर्चा हुई। हालांकि बैठक के बाद किसी भी पक्ष ने गठबंधन को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। ऐसे में दोनों दल फिलहाल इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में बदलते राजनीतिक समीकरणों और चुनावी चुनौतियों को देखते हुए भाजपा और अकाली दल दोनों ही अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं। यदि दोनों दल फिर से साथ आते हैं तो राज्य की चुनावी राजनीति पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
फिलहाल भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की यह मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में दोनों दलों की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।




