नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और व्यापार, निवेश, तकनीक तथा नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की। साथ ही, दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को अधिक व्यापक बनाने के अवसरों पर विचार किया गया।
तकनीक और विनिर्माण में सहयोग पर जोर
बैठक में उन्नत विनिर्माण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, कृषि, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों देश अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाकर आर्थिक संबंधों को नई गति देना चाहते हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में व्यापार, तकनीक और प्रतिभा के आदान-प्रदान को द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने आपसी हित के नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाशीं।
भारत-ईएफटीए समझौते से बढ़ेंगी संभावनाएं
भारत और ईएफटीए के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था। इसमें आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश को प्रोत्साहित करने और दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
संबंधों को नई दिशा देने की उम्मीद
प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में बनी सहमति को ठोस परियोजनाओं और निवेश में बदलना आगे की प्राथमिकता होगी।





