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शिवसेना के छह सांसदों के विलय मामले में 8 दिसंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट 8 दिसंबर को अंतिम सुनवाई करेगा। मंगलवार, 27 अक्टूबर को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने मामले को अंतिम निपटारे के लिए सूचीबद्ध किया।

यह याचिका शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने दायर की है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मान्यता दी गई थी।

सुनवाई में देरी का मुद्दा उठा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में मामले में नोटिस जारी किया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से अब तक कोई पेश नहीं हुआ। उन्होंने सुनवाई में हो रही देरी पर सवाल उठाया।

पीठ ने कहा कि संबंधित पक्ष को नोटिस की तामील हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने मामले को लंबित रखने के बजाय अंतिम सुनवाई के लिए 8 दिसंबर की तारीख तय कर दी।

लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को दी गई चुनौती

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 18 जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दी थी। इसके बाद शिंदे गुट के लोकसभा सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई।

अरविंद सावंत की याचिका में इस फैसले की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मामले में दल-बदल कानून और संसदीय लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

दल-बदल कानून पर टिकी निगाहें

इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि क्या सांसदों के एक समूह के दूसरे दल में शामिल होने को विलय की मान्यता दी जा सकती है, या इसके लिए मूल राजनीतिक दल का विलय होना भी आवश्यक है। संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल के मामलों से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले अंतरिम राहत देने से इनकार किया था। अब 8 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। अदालत के अंतिम फैसले से दोनों शिवसेना गुटों की संसदीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।

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