नई दिल्ली: प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी (एसपी) के रुख पर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी प्रमुख शरद पवार ने अभी तक इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख जाहिर नहीं किया है, जिससे विपक्षी गठबंधन और सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, परिसीमन विधेयक संसद के आगामी सत्र में पेश किए जाने की संभावना के बीच सभी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। एनसीपी (एसपी) की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने भी कहा है कि विधेयक पर पार्टी ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और मीडिया में चल रही खबरें अटकलों पर आधारित हैं।
परिसीमन का मुद्दा देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया में राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन और प्रतिनिधित्व को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों में अलग-अलग राय सामने आ रही है।
इस बीच शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या परिसीमन विधेयक को लेकर कोई राजनीतिक सहमति बन सकती है। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से बैठक के एजेंडे को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
एनसीपी (एसपी) नेताओं का कहना है कि पार्टी किसी भी निर्णय से पहले विधेयक के अंतिम प्रारूप का अध्ययन करेगी और सहयोगी दलों से भी चर्चा करेगी। सुप्रिया सुले ने पहले यह भी संकेत दिया था कि यदि विधेयक में सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि जैसे प्रावधान शामिल किए जाते हैं तो उस पर विचार किया जा सकता है।
वहीं, पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आई है। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए इसे लेकर अपनी असहमति जताई है।
फिलहाल, शरद पवार की चुप्पी ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। अब सबकी नजर एनसीपी (एसपी) के आधिकारिक रुख और संसद में विधेयक पेश होने के बाद पार्टी की रणनीति पर टिकी है।





