नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने प्रारंभिक आकलन में अहम जानकारी सामने रखी है। ISRO के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर आशंका जताई है कि 4.9 तीव्रता के भूकंप ने ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने की प्रक्रिया को ट्रिगर किया हो सकता है।
NRSC के मुताबिक, यह घटना तिब्बत के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र से शुरू हुई। ग्लेशियर के टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का भारी मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। इससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हुआ और बाद में अचानक बांध जैसा अवरोध टूटने से पानी, मिट्टी, चट्टान और मलबे का तेज बहाव निचले इलाकों की ओर बढ़ गया। इसका सबसे अधिक असर नेपाल के रसुवा क्षेत्र और त्रिशूली नदी तंत्र पर पड़ा।
भारतीय भूकंप निगरानी नेटवर्क के अनुसार, क्षेत्र में 4.9 तीव्रता का कंपन दर्ज किया गया था। यह घटना करीब 10 किलोमीटर की गहराई में दर्ज हुई। हिमालय को भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
हालांकि, इस आपदा के कारण को लेकर वैज्ञानिक जांच अभी जारी है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के बाद के विश्लेषण में संकेत दिया गया है कि दर्ज की गई भूकंपीय तरंगें स्वयं ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव से उत्पन्न हो सकती थीं। ऐसे में भूकंप को बाढ़ का कारण मानने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। कई सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए आपदा के कारण और नुकसान का आकलन लगातार किया जा रहा है।





