नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने निजी एफएम रेडियो स्टेशनों के लिए स्थानीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किया है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देश के सभी निजी एफएम रेडियो स्टेशनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके दैनिक प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा संबंधित शहर की स्थानीय भाषा में हो। साथ ही कार्यक्रमों में स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और लोक संगीत को भी प्रमुखता दी जाए।
सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लिखित उत्तर में बताया कि यह व्यवस्था प्राइवेट एफएम रेडियो फेज-III नीति के तहत लागू है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और श्रोताओं को उनकी संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार, वर्तमान में देश में 386 निजी एफएम रेडियो चैनल संचालित हो रहे हैं। हाल ही में 234 नए शहरों में 730 एफएम चैनलों की ई-नीलामी की गई थी, जिसमें 18 बोलीदाता सफल रहे। इनमें नौ नए प्रतिभागियों ने पहली बार एफएम रेडियो क्षेत्र में प्रवेश किया है।
मंत्री ने बताया कि सरकार प्रसारण सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है। फेज-III नीति के तहत निजी एफएम प्रसारकों को, जहां संभव हो, प्रसार भारती के टावरों और अन्य बुनियादी ढांचे के उपयोग की अनुमति दी जाती है, जिससे नए चैनलों का संचालन तेजी से शुरू हो सके।
सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा में प्रसारण बढ़ने से क्षेत्रीय संस्कृति और लोक परंपराओं का संरक्षण होगा, साथ ही श्रोताओं को अपने क्षेत्र से जुड़े विषयों पर अधिक गुणवत्तापूर्ण और प्रासंगिक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। इस पहल को भारत की भाषाई विविधता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





