देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने के लक्ष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने शिक्षा, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य राज्य में साक्षरता दर को शत–प्रतिशत के करीब ले जाना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
बैठक में तय किया गया कि राज्य में निरक्षर लोगों की पहचान कर विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पंचायत स्तर तक सर्वे कर ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाएगा, जिन्हें बुनियादी साक्षरता और डिजिटल ज्ञान उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने पर भी जोर दिया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।
कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर साक्षरता अभियान को गति देंगे। स्वयंसेवी संगठनों और शिक्षण संस्थानों की मदद से विशेष कक्षाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सुविधाओं के विस्तार पर भी बल दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर उत्तराखंड को “पूर्ण साक्षर राज्य” घोषित किया जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग प्रणाली भी विकसित की जाएगी, जिससे अभियान की प्रगति का आकलन किया जा सके।
इसके अलावा कैबिनेट बैठक में अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई, जिनमें शिक्षा व्यवस्था में सुधार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि साक्षरता किसी भी राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड जल्द ही पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करेगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल शिक्षा स्तर में सुधार होगा, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।





