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तुर्किये के S-400 सौदे से बदल सकते हैं पश्चिम एशिया के सुरक्षा समीकरण, नाटो और अमेरिका की बढ़ी चिंता

अंकारा। तुर्किये द्वारा रूस से खरीदी गई एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस प्रणाली को किसी खाड़ी देश को बेचने की संभावनाओं ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इस प्रणाली का संभावित खरीदार माना जा रहा है, हालांकि इस सौदे के लिए रूस की मंजूरी आवश्यक होगी।

तुर्किये ने वर्ष 2017 में रूस से एस-400 प्रणाली खरीदी थी। इसके बाद अमेरिका ने उसे एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम से बाहर कर दिया और प्रतिबंध भी लगाए। माना जा रहा है कि यदि तुर्किये एस-400 प्रणाली अपने पास से हटाने में सफल रहता है, तो अमेरिका के साथ उसके रक्षा संबंधों में सुधार और एफ-35 कार्यक्रम में वापसी का रास्ता खुल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यूएई जैसे खाड़ी देश के पास एस-400 प्रणाली पहुंचती है, तो पश्चिम एशिया का वायु रक्षा संतुलन बदल सकता है। इससे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी, लेकिन अमेरिकी और नाटो देशों की चिंताएं भी बढ़ेंगी। पश्चिमी देशों को आशंका है कि रूसी तकनीक अमेरिकी सैन्य ढांचे और उन्नत विमानों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि भारत द्वारा एस-400 प्रणाली के प्रभावी उपयोग के बाद इस एयर डिफेंस सिस्टम की विश्वसनीयता और बढ़ी है, जिससे खाड़ी देशों की रुचि इसमें बढ़ी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा पूरा होता है, तो पश्चिम एशिया में रणनीतिक गठबंधनों और रक्षा समीकरणों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

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